मित्रों, फ़िर आया हूँ...
आपका यह मित्र ढांचागत परियोजनाओ से जुड़ा हुआ है... और पहले शाशकीय सेवा करने के उपरांत अब प्राइवेट सेक्टर में काम करता है... वो ही हूँ मै कोई और नहीं जो पहले राज्य की सेवा कर रहा था... हाँ बहुत छोटे स्तर पर इस देश में विडम्बना है ये कि इस महान भारतवर्ष में देश के विकास के लिए परियोजना बनाना उन लोगो के हाथो में रहता है (मै जिला स्तर कि बात कर रहा हूँ) जिनको शायद यह नहीं पता कि सरकार के पास जो भी धन है यह बेचारी जनता के खून पसीने से आता है... तो वो भद्रजन अपने "विवेक" का इस्तेमाल करते हुए, तमाम ऐसे कामो के लिए धन का आवंटन करते है जिनका कोई मतलब ही नहीं होता... हाँ, ठीक है कि आप गरीबी रेखा के नीचे के लोगो के लिए रोजगार का अवसर दे रहे है परन्तु मान्यवर, ये ही अवसर उस कार्य को करके भी पैदा किया जा सकता है जिससे जनता के धन कि भी कीमत उचित रूप से मिल सकती है... उदहारण के रूप में मै बता रहा हू कि कच्ची सड़क बना कर हम क्या देते है गाँव कि जनता को? कुछ नहीं... आज कच्ची सड़क बनती है, फ़िर बारिश में कट जाती है और गाँव फ़िर से बिना संपर्क मार्ग के रह जाता है..... अपनी किस्मत पर रोते हुए.... कितना उचित होता कि हम (हमारे विद्वान योजनाकार) कच्चे संपर्क मार्ग कि अवधारणा को छोड़ कर पक्के संपर्क मार्ग की सोच लेते... रोजगार भी मिलता, सदाकी भी मिलती और हमारे जैसे करदाताओ को भी अभिमान होता की हाँ साहब हमारे दिए गए पैसे का सदुपयोग हुआ.....
ऐसे बहुत सारी बातें है... जिनमे योजनागत खामी है... विस्तार से जिक्र करूँगा पर तब तक अपने विचार दीजिये....
क्या मेरा सोचना ग़लत है?????
Saturday, January 31, 2009
आख़िर कब तक???
मित्रो, मेरी समझ में एक बात नही आ रही। आप सब भी जानते ही होंगे की देश में पोलियो से बचने के लिए टीका करण का अभियान चलाया जा रहा है। करोडो रुपया बर्बाद किया जा रहा है । फ़िर भी पोलियो जस का तस है... हर साल सरकार बताती है कि पोलियो का लक्ष्य पूरा कर लिया गया। फ़िर १० दिनों बाद टीवी या न्यूज़ पेपर से पता चलता है कि भाई... पोलियो अभी ख़तम नही हुआ, अमुक राज्य के तमुक गाँव में फ़िर से मिल गए पोलियो ग्रस्त बच्चे... ॥
करण क्या है? क्यो नही ख़तम होता ये पोलियो? क्यो नही करती सरकार सख्ती? हम इस देश के नागरिक... कब तक अपने दिए गए टैक्स कि बर्बादी होती देखते रहेंगे ? सिर्फ़ इसलिए कि कुछ सरफिरे लोगो कि समझ में बात नही आती कि भाई पोलियो ड्राप पिलाने से कोई नुकसान नही है... किसी के धर्म को, जाति को ख़तम करने के लिए नही बनती है दवा... दवा बनती है इंसानियत के लिए... लोगो कि भलाई के लिए, उनको रोगों से मुक्ति दिलाने के लिए... न कि उनकी जाति या धर्म को ख़तम करने के लिए...
दूसरी बड़ी बात है कि हमारे तमाम सरकारी अहलकार अपने काम को ईमानदारी से नही करते... देश बहुत आगे गया फ़िर भी अभी भी हमारे पास तमाम छोटी छोटी सुविधाए नही है.... पोलियो ड्राप आता है, उसको रखने के लिए एक विशेष तापमान की जरुरत होती है... उसके लिए उचित प्रबंध नही है हमारे पास... तमाम बड़े बड़े कारपोरेट है जो क्रिकेट, फिल्म्स और पता नही किन किन बातो के लिए पैसे देते रहते है... तमाम गैर सरकारी संस्थान जिनको देश विदेश से पता नही कितना धन मिलता है... और उस तरह के ही तमाम संस्थान जो इन तरह के आयोजनों से जुड़े रहते है किसी के पास धन की कमी नही है... और धन मिलता भी रहता है अभी भी मिल ही रहा है... वो सब क्यो नही करते ऐसा इंतजाम कि जो भी दवा आई है... उसका उचित इस्तेमाल हो... वो बर्बाद ना हो... क्यो नही किया जाता तापमान को नियंत्रित रखने का प्रबंध ?
दोस्तों... मै ना तो समाज सेवक हू ना ही कोई डॉक्टर ... मै इन देश का एक आम नागरिक हु जो अपनी गाढ़ी कमाई से ३०% कर आयकर देता हू.... इसलिए मुझे दर्द है... हमारे धन की ऐसी बद-इन्तजामी ???
क्या हम कुछ कर सकते है???? सुझावों का स्वागत है...
करण क्या है? क्यो नही ख़तम होता ये पोलियो? क्यो नही करती सरकार सख्ती? हम इस देश के नागरिक... कब तक अपने दिए गए टैक्स कि बर्बादी होती देखते रहेंगे ? सिर्फ़ इसलिए कि कुछ सरफिरे लोगो कि समझ में बात नही आती कि भाई पोलियो ड्राप पिलाने से कोई नुकसान नही है... किसी के धर्म को, जाति को ख़तम करने के लिए नही बनती है दवा... दवा बनती है इंसानियत के लिए... लोगो कि भलाई के लिए, उनको रोगों से मुक्ति दिलाने के लिए... न कि उनकी जाति या धर्म को ख़तम करने के लिए...
दूसरी बड़ी बात है कि हमारे तमाम सरकारी अहलकार अपने काम को ईमानदारी से नही करते... देश बहुत आगे गया फ़िर भी अभी भी हमारे पास तमाम छोटी छोटी सुविधाए नही है.... पोलियो ड्राप आता है, उसको रखने के लिए एक विशेष तापमान की जरुरत होती है... उसके लिए उचित प्रबंध नही है हमारे पास... तमाम बड़े बड़े कारपोरेट है जो क्रिकेट, फिल्म्स और पता नही किन किन बातो के लिए पैसे देते रहते है... तमाम गैर सरकारी संस्थान जिनको देश विदेश से पता नही कितना धन मिलता है... और उस तरह के ही तमाम संस्थान जो इन तरह के आयोजनों से जुड़े रहते है किसी के पास धन की कमी नही है... और धन मिलता भी रहता है अभी भी मिल ही रहा है... वो सब क्यो नही करते ऐसा इंतजाम कि जो भी दवा आई है... उसका उचित इस्तेमाल हो... वो बर्बाद ना हो... क्यो नही किया जाता तापमान को नियंत्रित रखने का प्रबंध ?
दोस्तों... मै ना तो समाज सेवक हू ना ही कोई डॉक्टर ... मै इन देश का एक आम नागरिक हु जो अपनी गाढ़ी कमाई से ३०% कर आयकर देता हू.... इसलिए मुझे दर्द है... हमारे धन की ऐसी बद-इन्तजामी ???
क्या हम कुछ कर सकते है???? सुझावों का स्वागत है...
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